संसद में ऐतिहासिक बहस: “जब नेहरू और इमरजेंसी पर चर्चा हो सकती है, तो नोटबंदी पर क्यों नहीं?”

# ## National
संसद में ऐतिहासिक बहस: “जब नेहरू और इमरजेंसी पर चर्चा हो सकती है, तो नोटबंदी पर क्यों नहीं?”
लोकसभा में कार्यवाही के दौरान जब विपक्ष ने नोटबंदी (Demonetization) का मुद्दा उठाया, तो अध्यक्ष और विपक्ष के बीच नियमों और समयसीमा को लेकर एक वैचारिक टकराव की स्थिति पैदा हो गई।
ओम बिरला का तर्क: चर्चा के दौरान जब नोटबंदी का जिक्र आया, तो स्पीकर ओम बिरला ने टोकते हुए कहा कि अब उस बात को करने का क्या तुक है, वह तो 9 साल पुरानी घटना हो चुकी है। उनका संकेत था कि सदन को वर्तमान के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
अभिषेक बनर्जी का पलटवार: ओम बिरला की टिप्पणी पर अभिषेक बनर्जी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने ‘तारीखों और सालों’ के गणित को लेकर भाजपा की रणनीति को घेरा।
इमरजेंसी और नेहरू का हवाला: अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अगर 9 साल पुरानी नोटबंदी पर बात नहीं हो सकती, तो:
भाजपा नेता 50 साल पहले लगी इमरजेंसी पर आज भी क्यों बोलते हैं? तब उन्हें क्यों नहीं रोका जाता?
60 साल पहले निधन हो चुके जवाहरलाल नेहरू पर जब भाजपा नेता हमलावर होते हैं, तो अध्यक्ष चुप क्यों रहते हैं?
दोहरे मापदंड का आरोप: टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि अगर नेहरू और इमरजेंसी आज भी प्रासंगिक हैं, तो देश की अर्थव्यवस्था को हिला देने वाली नोटबंदी पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती?