लखनऊ विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में “सतत पर्यावरण के लिए भू-विज्ञान और जलवायु परिवर्तन” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन जियोकोन-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में 29 विश्वविद्यालयों व करीब 20 प्रमुख राष्ट्रीय शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक भी सम्मिलित होंगे। सम्मेलन का उद्घाटन आज विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित होगा।
देशभर से आए वैज्ञानिक सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, सतत संसाधन प्रबंधन, हिमालयी भूविज्ञान, भूजल अध्ययन, पृथ्वी की पर्पटी का विकास व आधुनिक भू-विज्ञान तकनीकों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। देश भर के विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों, शिक्षकों और शोधार्थियों द्वारा 100 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
यह वैज्ञानिक रहेंगे मौजूद
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना के निदेशक प्रो. टीएन सिंह, सीएसआईआर-उत्तर पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, जोरहाट के निदेशक डॉ. वीएम तिवारी, सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, गोवा के निदेशक प्रो. सुनील कुमार सिंह, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद के निदेशक डॉ. धीरज पाण्डेय, राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान अध्ययन केन्द्र, तिरुवनंतपुरम के निदेशक प्रो. एनवी चालपति राव, इंटर यूनिवर्सिटी एक्सेलरेटर सेंटर, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. एसी पाण्डेय उपस्थित रहेंगे। विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुव सेन सिंह ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और युवा शोधार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करना है।
