(www.arya-tv.com) वाराणसी में जी-20 देशों के प्रतिनिधियों ने काशी की प्राचीन संस्कृति और विरासत को गुरुवार रात करीब से देखा। जी-20 देशों का वर्किंग ग्रुप समिट के बाद भगवान बुद्ध के उपदेश स्थली सारनाथ पहुंचा।
रात में गाला डिनर हुआ। इसमें कलाकारों ने संगीत प्रस्तुतियां दी। विदेशी मेहमान बांसुरी, संतूर, गिटार, तबला की धुन पर झूमे। देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।
इससे पहले अतिथियों का गुलाब की पंखुड़ियों से वेलकम किया गया। टीका लगाकर अंगवस्त्रम भेंट किए गए।
जी-20 डेलीगेट्स को बताईं सारनाथ की विशेषताएं
सारनाथ में अशोक का चतुर्मुख सिंह स्तम्भ, भगवान बुद्ध का मन्दिर, धामेख स्तूप, चौखन्डी स्तूप, राजकीय संग्रहालय, जैन मन्दिर, चीनी मन्दिर, मूलंगधकुटी और नवीन विहार देखे गए।
विदेशी मेहमानों को बताया गया कि भारत का राष्ट्रीय चिह्न यहीं के अशोक स्तंभ के मुकुट से लिया गया। 1905 में पुरातत्व विभाग ने यहां खुदाई की थी। उसी समय बौद्ध धर्म के अनुयायों और इतिहास के विद्वानों का ध्यान इधर गया।काशी आए जी-20 देशों के मेहमानों ने सारनाथ प्रत्येक ऐतिहासिक स्थल का भ्रमण किया। पुरातत्व साइट व म्यूजियम को देखा और विरासतों का इतिहास जाना।अतिथियों में उत्साह दिखा और ऐतिहासिक स्थल पर खूब सेल्फी खिंचवाई। सारनाथ की पुरातत्व अवशेषों को लेकर अतिथियों में काफी कौतूहल व उत्साह भी नजर आया। बौद्ध स्तूप के अलावा पुरातत्व अवशेषों के पास खड़े हो निहारते रहे।
सुरों की शाम में मंत्रमुग्ध हुए विदेशी मेहमान
कल्चरल वर्किंग ग्रुप के 170 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपीय संघ, जर्मनी, फ्रांस, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये, यूनाइटेड किंगडम और यूएसए देश शामिल रहे।
काशी के एक होटल में गुरुवार रात सुरों की शाम “संगीत की लहरें” सजी। संस्कृति मंत्रालय की ओर से कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की चार रोमांचक प्रस्तुतियां दीं। केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने सभी कलाकारों को स्मृति चिह्न दिए।
