नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए बेहद सख्त बयानों ने हालात को इतना गंभीर बना दिया कि आखिरकार उन्हीं पर पीछे हटने का दबाव बन गया और उन्हें सीजफायर के लिए मानना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ रॉबिंदर सचदेव ने ANI से बातचीत में कहा कि यह युद्धविराम बिल्कुल सही समय पर हुआ, क्योंकि यह संभावित हमले की समय-सीमा खत्म होने से सिर्फ एक घंटे पहले लागू हुआ। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से तनाव और टकराव की ओर बढ़ रही थी और हालात बेहद खतरनाक हो गए थे।
‘खुद की पार्टी भी हो गई थी ट्रंप के खिलाफ’
सचदेव के मुताबिक, ट्रंप का यह बयान कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ‘पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी’, हालात को और भड़का गया। इस बयान ने खुद ट्रंप पर ही दबाव बढ़ा दिया कि वे पीछे हटें और तनाव कम करें। उन्होंने बताया कि ट्रंप के इस बयान की आलोचना उनकी अपनी पार्टी के नेताओं ने भी की। इतना ही नहीं, पोप लियो चौदहवें ने भी बिना नाम लिए कहा कि किसी पूरी सभ्यता को खत्म करने की बात करना ईसाई मूल्यों के खिलाफ है।
‘अभी भी कई मायनों में उलझा है सीजफायर’
हालांकि, राहत के बावजूद सचदेव ने कहा कि यह युद्धविराम अभी भी कई मायनों में उलझा हुआ है। ईरान की ओर से जो 10 बिंदुओं का प्रस्ताव सामने आया है, उसमें उसकी अधिकतम मांगें शामिल हैं। इनमें क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हटाना, ईरान के फ्रीज किए गए फंड को खोलना और युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई जैसी बातें शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने भले ही परमाणु हथियार न बनाने की बात कही है, लेकिन उसकी बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई स्पष्ट चर्चा नहीं है।
‘इजरायल ने पहले भी सीजफायर तोड़ा है’
सचदेव के मुताबिक, आने वाले 2 हफ्ते बेहद अहम होंगे, क्योंकि इस्लामाबाद में इन मुद्दों पर आगे बातचीत होनी है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी कई बड़े मुद्दे अधूरे हैं, जैसे यूरेनियम हटाने और ट्रंप द्वारा पहले कही गई शासन परिवर्तन की बात पूरी नहीं हुई। सचदेव ने इजरायल को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि फिलहाल वह अमेरिका के साथ कदम मिलाकर तनाव कम कर रहा है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा बनाए रखना उसके लिए मुश्किल हो सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि इजरायल पहले भी कई बार सीजफायर तोड़ चुका है, इसलिए आने वाले दिनों में उसका रुख अहम रहेगा।
‘सप्लाई सामान्य होने में लग सकता है समय’
भारत के नजरिए से इस घटनाक्रम को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए सचदेव ने कहा कि भारत अपनी लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल की जरूरत हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए पूरी करता है। इसके अलावा LNG और LPG की सप्लाई भी इसी रास्ते से होती है। उन्होंने कहा कि भले ही इस जलडमरूमध्य के खुलने से वैश्विक बाजार में राहत मिलेगी, लेकिन सप्लाई सामान्य होने में 1 से 2 महीने का समय लग सकता है। सचदेव ने यह भी दावा किया कि अब ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ की प्रकृति बदल रही है। पहले इसे एक अंतरराष्ट्रीय मार्ग की तरह देखा जाता था, लेकिन अब यह ईरान के प्रभाव में आ सकता है।
‘प्रति डॉलर लग सकता है 1 डॉलर का टोल’
सचदेव ने कहा कि ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में प्रति बैरल लगभग 1 डॉलर का टोल लगाया जा सकता है, जिसे ईरान और ओमान के बीच बांटा जा सकता है। पूरे घटनाक्रम पर निष्कर्ष देते हुए सचदेव ने कहा कि इस संघर्ष में ईरान मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका जैसे महाशक्ति और इजरायल जैसे शक्तिशाली देश का सामना किया, भारी नुकसान झेलने के बावजूद उसकी सरकार न तो गिरी और न ही उसने आत्मसमर्पण किया। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पहले से ज्यादा पकड़ बना ली है, जो उसके लिए एक नया रणनीतिक हथियार बन गया है।
