डिजिटल क्रांति से मंडियों में नई रफ्तार: यूपी की 162 मंडियां ई-नैम से जुड़कर किसानों को दे रही वाजिब दाम और तेज भुगतान

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नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नैम) से आपस में जुड़ी प्रदेश की 162 मंडियों में किसानों और व्यापारियों के लिए कारोबार आसान हो गया है। इस डिजिटल प्रणाली से दिन पर दिन किसान और व्यापारी जुड़ रहे हैं तो मंडी परिषद भी इनकी सुविधाओं को देखते हुए शेष मंडियों को ई-नैम से जोड़ने की तैयारी में है।

प्रदेश में कुल 251 मंडियां हैं। इनमें वर्ष 2016-17 में 66 मंडियां ई-नैम प्रणाली से जोड़ी गईं थी। इस प्रक्रिया में आपस में जुड़ी जिलों की मंडियों से किसान ऑनलाइन अपनी उपज प्रदर्शित करके वहां के व्यापारियों से सीधे संपर्क में आकर बिक्री करते हैं। व्यापारी स्वयं उपज भी मंगाते हैं।

इसके अलावा मंडियों में बनी लैब में उपज का परीक्षण किया जाता है और उसी आधार पर ग्रेडिंग और दाम तय होते हैं। इससे किसानों को उनकी उपज के पूरे दाम मिलते हैं और भुगतान भी 24 घंटे के अंदर उनके खातों में आता है। इस प्रणाली से किसान और व्यापारियों को फायदा हुआ तो वर्ष 2017-18 में 34 मंडी, वर्ष 2020-21 में 25 मंडी, वर्ष 2024-25 में 37 मंडी ई-नैम से आपस में जोड़ी गई। इससे कारोबार की राह आसान होने पर मंडी परिषद ने शेष मंडियों को ई-नैम से जोड़ने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है।

डिजिटल से 40,935 कारोबारी, 33.05 लाख किसान जुड़े

करीब 10 वर्ष में ई-नैम से जुड़ी 162 मंडियों में 40,935 व्यापारी और 33,05,600 किसान डिजिटल कारोबार कर रहे हैं। कागजी प्रक्रिया के साथ समय की बचत हुई है और औने-पौने दामों में उपज की बिक्री रुकी है। वहीं, ऑनलाइन प्रणाली से मंडी समितियों के कार्यों में पारदर्शिता आई है और कार्य भी आसान हो गए हैं। इन वर्षों में कारोबार में भी तेजी से इजाफा हुआ है। अब तक 814.86 लाख मीट्रिक टन उपज किसानों ने बेची है।