- विश्वविद्यालय में पेटेंट संस्कृति विकसित करना आवश्यक : प्रो. राज कुमार मित्तल
लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) के तत्वावधान में 9 फरवरी को बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. यासिर अब्बास जैदी, एग्जामिनर ऑफ पेटेंट डिज़ाइन एवं NIPAM ऑफिसर उपस्थित रहे। मंच पर प्रो. सुनीता मिश्रा तथा IIC-BBAU के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा मौजूद रहे। वहीं आईपीआर जैनिक्स प्राइवेट लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट आदित्य कुमार शर्मा ऑनलाइन माध्यम से सम्मिलित हुए।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार शोध और नवाचार का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने संकाय सदस्यों से आह्वान किया कि विश्वविद्यालय में “एक फैकल्टी–एक पेटेंट” की संस्कृति विकसित की जाए, ताकि शोध, उद्योग और समाज के बीच मजबूत सेतु स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि वास्तविक शोध वही है जो नवाचार को जन्म दे और समाज के लिए उपयोगी हो।
मुख्य अतिथि डॉ. यासिर अब्बास जैदी ने कहा कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर IPR से जुड़ी होती है। उन्होंने आईपीआर जागरूकता पर जोर देते हुए विश्वविद्यालयों से स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया। आदित्य कुमार शर्मा ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में आईपीआर की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आईपीआर नवाचार को कानूनी संरक्षण और आत्मविश्वास प्रदान करता है। प्रो. सुनीता मिश्रा ने कहा कि आईपीआर यह स्पष्ट करता है कि कौन सा शोध पेटेंट योग्य है, जिससे शोधकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है।
प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने बताया कि आईपीआर ज्ञान को कानूनी पहचान देकर अकादमिक और उद्योग जगत के बीच सहयोग को सशक्त बनाता है। इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन CIIE, IIC एवं IQAC द्वारा डॉ. सूफिया अहमद के संयोजन में किया गया।
कार्यक्रम में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनकी अध्यक्षता डॉ. यासिर अब्बास जैदी एवं आदित्य कुमार शर्मा ने की। अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं शॉल भेंट किए गए तथा डॉ. अनीस अहमद ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
