कप‍िल स‍िब्‍बल ने भरे सुप्रीम कोर्ट में दी दलील पर दलील, फ‍िर भी आजम खान को लगा झटका

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(www.arya-tv.com)  समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान की ओर से दायर याचिका को खारिज कर द‍िया है. आजम खान की तरफ से कप‍िल स‍िब्‍बल पेश हुए थे. आपको बता दें क‍ि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें रामपुर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को सरकारी जमीन का पट्टा रद्द करने का फैसला क‍िया था.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI)डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान द्वारा स्थापित मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया. इस याच‍िका में 4 फरवरी 2015 की तारीख वाले पट्टे को रद्द करने को चुनौती दी गई थी. ट्रस्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 18 मार्च, 2024 को दिए गए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें 31 मार्च 2023 को लिए गए सरकार के फैसले के खिलाफ उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी.

क्‍या थी स‍िब्‍बल की दलील?
सुप्रीम कोर्ट में कप‍िल स‍िब्‍बल ने दलील दी क‍ि यूपी सरकार ने ज‍िस पब्‍ल‍िक स्‍कूल की मान्‍यता को रद्द क‍िया है वहां 300 बच्चे पढ़ रहे है. स‍िब्‍बल ने कहा क‍ि लिहाजा हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई जाए. इतना ही नहीं यूपी सरकार के फैसले को रद्द करने की मांग की गई. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सरकारी अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि ट्रस्ट को पट्टे पर दी गई जमीन पर चल रहे स्कूल के छात्रों को वैकल्पिक उपयुक्त संस्थानों में प्रवेश मिले.

CJI ने क्‍या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में ट्रस्ट की ओर से पेश सीन‍ियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि बिना कोई कारण बताए यह फैसला लिया गया. हालांकि, सीजेआई चंद्रचूड़ ने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि 2015 में लीज देने का फैसला तब लिया गया था जब आजम खान मंत्री थे, निजी ट्रस्ट को दिए जा रहे लीज की वैधता पर संदेह जताया, जिसके खान आजीवन सदस्य थे. सीजेआई ने फैसले को पढ़ते समय कहा क‍ि ऐसा प्रतीत होता है कि आपके मुवक्किल (आजम खान) वास्तव में शहरी विकास मंत्रालय के प्रभारी कैबिनेट मंत्री थे और वे अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री थे. उन्होंने जमीन एक पारिवारिक ट्रस्ट को आवंटित करवाई, जिसके वे आजीवन सदस्य हैं और लीज शुरू में एक सरकारी संस्थान के पक्ष में थी, जो एक निजी ट्रस्ट से जुड़ी हुई है. एक लीज जो सरकारी संस्थान के लिए थी, उसे निजी ट्रस्ट को कैसे दिया जा सकता है?

सीजेआइ के सवाल का स‍िब्‍बल ने द‍िया क्‍या जवाब?
सि‍ब्‍बल ने कहा क‍ि उन्‍हें केस के फैक्‍ट से कोई द‍िक्‍कत नहीं है. सिब्बल ने इस बात पर जोर द‍िया क‍ि याचिकाकर्ता को उचित नोटिस नहीं दिया गया था. उन्‍होंने कहा क‍ि मैं इनमें से किसी पर विवाद नहीं कर रहा हूं. मुद्दा यह है क‍ि अगर उन्होंने मुझे नोटिस और कारण बताए होते, तो मैं इसका जवाब दे सकता था. क्योंकि, आखिरकार मामला कैबिनेट के पास गया मुख्यमंत्री ने फैसला लिया. स‍िब्‍बल ने कहा क‍ि ऐसा नहीं है कि मैंने फैसला लिया.

पद का दुरुपयोग
सीजेआई ने कहा कि मामले के तथ्य स्पष्ट रूप से पद के दुरुपयोग को उजागर करते हैं और जब तथ्य इतने स्पष्ट हैं, तो उचित नोटिस देने से इनकार करना कोई बड़ा उल्लंघन नहीं हो सकता है. सीजेआई ने कहा क‍ि यह पद का दुरुपयोग है.आपको बता दें क‍ि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के भवन में रामपुर पब्लिक स्कूल खोलने की योजना सरकार द्वारा रद्द करने के आदेश की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था. मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की कार्यकारिणी परिषद की तरफ से यह याचिका दाखिल की गई थी.