पर्वतीय महापरिषद की ओर से गोमती तट स्थित पं. गोविन्द बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन में चल रहे 15 दिवसीय उत्तरायणी कौथिग के 7वें दिन पहाड़ की आवाज शीर्षक से गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में लखनऊ में रह रहे दिग्गज पहाड़ी लोकगायकों ने भाग लिया।
पर्वतीय महापरिषद के सचिव शंकर पाण्डेय की परिकल्पना से उत्तराखंड के पारम्परिक घर, आंगन, फुलवारी व नदी घाटियों से सुसज्जित मंच साक्षात् पहाड़ में होने की अनुभूति करा रहे थे। पहाड़ की आवाज प्रतियोगिता के माध्यम से लखनऊ में रह रहे प्रवासी निपुण लोकगायकों के सुरों से गोमती तट गूंजती पहाड़ की वादियों सा प्रतीत हुआ।
तीन दिन तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में मंगलवार को बलवंत वाणगी, दिव्यांशु जोशी, राधा मेहरा, ललिता जोशी व रीमा वाणगी ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। संस्था के महासचिव महेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंडी प्रवासी समाज की नई पीढ़ी यूं तो बहुत सारे संगीत में पारंगत है लेकिन उत्तराखंडी भाषा का ज्ञान न होने के कारण उत्तराखंडी गीत नहीं गा पाते हैं। उनको उत्तराखंडी गीतों की ओर मोड़ने एवं जो लोग उत्तराखंडी गीत जानते हैं, उनको अच्छे लेवल की तैयारी के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से पहाड़ की आवाज के माध्यम से गायन प्रतियोगिता रखी गई है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में क्षेत्रीय शाखाओं की नृत्य प्रस्तुतियां, झोड़ा प्रतियोगिताएं जिसमें विजय नगर लखनऊ से हेमा बनकोटी, कटहरी बाग निलमथा से सरोजनी कठैत, शाहीनूर कालोनी से चम्पा महर एवं आदर्श नगर निलमथा से मुन्नी रावत के निर्देशन में झोड़ा टीमों ने भाग लिया।
