कामर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत से कम्युनिटी किचन प्रभावित… अस्पतालों और मंदिरों में भोजन वितरण पर संकट

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लखनऊः कामर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति पर रोक से एनजीओ से संचालित होने वाले कम्युनिटी किचन से लेकर केजीएमयू के हॉस्टलों के छात्रों तक की थाली पर असर पड़ने लगा है। हास्टल की मेस में नाश्ता नहीं बन पाया, इंडक्शन और अंगीठी से जैसे तैसे भोजन काम चलाऊ भोजन तैयार हो पा रहा है।

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के करीब 20 हॉस्टल में लगभग 10 हजार मेडिकल छात्र-छात्राएं रहते हैं। ज्यादातर हॉस्टलों में एक से दो मेस संचालित होती हैं। इन सभी में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग होता है। इस समय कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति ठप है। इससे मेस का संचालन गड़बड़ा गया है। शुक्रवार को भी करीब 10 हजार छात्र-छात्राओं को सीमित संसाधनों के बीच किसी तरह भोजन उपलब्ध कराया गया। कई हॉस्टलों में सुबह का नाश्ता तक नहीं बन पाया। कुछ मेस में इंडक्शन चूल्हे और अंगीठी की मदद से सीमित मात्रा में भोजन बनाया गया। कई मेस में दोपहर और रात के खाने की ही व्यवस्था हो सकी। छात्रों का कहना है कि सुबह नाश्ता नहीं मिलने से उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है। सरदार पटेल हॉस्टल के प्रोवोस्ट ने संस्थान के चीफ प्रॉक्टर को पत्र लिखकर बताया कि गैस की कमी के कारण मेस में नियमित भोजन बनाना संभव नहीं हो पा रहा है। यदि जल्द गैस आपूर्ति सुचारु नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। छात्रों ने भी प्रशासन से जल्द गैस आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की है।

केजीएमयू में संचालित धनवंतरि अन्नपूर्णा केंद्र भी दो दिन से बंद है। यहां रोजाना करीब 250 से 300 लोगों को दाल-चावल और छोला-चावल वितरण किया जाता था। समिति के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति बंद होने के कारण फिलहाल सेवा को फिलहाल रोकना पड़ा है। गैस उपलब्ध होते ही भोजन वितरण की सेवा शुरू कर दी जाएगी। लोहिया संस्थान में प्रसादम सेवा चलाने वाले विशाल सिंह ने बताया कि किसी तरह व्यवस्था करके लोगों को भोजन दिया जा रहा है, किंतु यदि जल्द ही सिलेंडर नहीं मिले तो सेवा बंद करनी पड़ेगी।

भंडारों पर भी असर

कामर्शियल गैस सिलेंडर की कमी का असर मंदिरों में लगने वाले भंडारों पर भी पड़ा है। गोमती तट स्थित लेटे हुए हनुमान जी मंदिर में प्रतिदिन चलने वाली भंडारा सेवा भी पिछले दो दिनों से बंद है। समिति के ऋद्धि गौढ़ ने बताया कि यहां रोजाना करीब 150 से 200 लोगों को दाल-चावल, छोला-चावल और पूड़ी-सब्जी का प्रसाद वितरित किया जाता था। गैस सिलेंडर नहीं मिलने से फिलहाल यह सेवा ठप हो गई है।

लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस सिलेंडर की आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो कम्युनिटी किचन और भंडारा सेवाओं पर संकट और गहरा सकता है, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी।