बरेली। टाइल्स-पत्थर के काम की बकाया रकम मांगने पर मिस्त्री की गोली मारकर हत्या करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-5 तबरेज अहमद ने एजाज नगर गौटिया, नूरी नगर निवासी रिटायर्ड फौजी रफीक अहमद को परीक्षण में दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास व 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई ।
सरकारी वकील मनोज वाजपेयी और दिगम्बर पटेल ने बताया कि वादी शुजात हुसैन ने थाना बारादरी थाने में तहरीर देकर बताया था कि उसके पुत्र मो. शादाब ने रिटायर फौजी रफीक के घर पर टाइल्स-पत्थर लगाने का ठेका 14 हजार रुपए में लिया था। रफीक ने 7500 रुपये दे दिये थे। 6500 रुपये बकाया थे। 26 दिसम्बर 2018 को उसके पुत्र मो. शादाब व नूर मोहम्मद रकम मांगने गए थे। रफीक ने आग बबूला होकर पुत्र नूर मोहम्मद को लाइसेंसी पिस्टल से गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी । मो. शादाब के सिर पर लाठी मारकर लहूलुहान कर दिया। पुलिस ने हत्या, जानलेवा हमला अपमानित करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना उपरांत रफीक के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट भेजा था। अभियोजन ने 12 गवाह पेश किए।
