(www.arya-tv.com)इलाहाबाद हाईकोर्ट में हलफनामा देने के करीब आठ साल बाद भी उत्तर प्रदेश में कर्मचारियों को कैश लेस इलाज की सुविधा नहीं मिल पाई है। योजना का लाभ पाने के लिए साढ़े तीन लाख गोल्डन कार्ड भी बना दिए गए, लेकिन उसका भी फायदा नहीं हुआ है। अब इस मुद्दे को लेकर कर्मचारी संगठन एक बार फिर से प्रदेश सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी से बात की है। दलील दी कि सरकार ने खुद 2013 में कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल करते हुए इसको लागू करने की बात कही थी। लेकिन 8 साल से कर्मचारी इस योजना का इंतजार कर रहे हैं।
BJP ने नामकरण भी किया था
साल 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद कैशलेस इलाज का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैश लेस चिकित्सा सेवा भी दे दिया। इस बात को चार साल से ज्यादा हो गए, लेकिन मामला नाम रखने से आगे नहीं बढ़ पाया। हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि बाद के सालों में साल 2018 में शासन स्तर पर उस समय के तात्कालिक मुख्य सचिव के साथ वार्ता हुई। उस समय भी सहमति बनी लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा।
75 करोड़ राशि आवंटित
योजना के लिए सरकार की तरफ से 75 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई थी। लेकिन यह भी मामला महज कागजों तक समित रहा। इस पैसे का कोई हल नहीं निकला। आज भी कर्मचारी पीजीआई समेत कई बड़े संस्थानों में पैसा देकर इलाज कराते हैं। उसके बाद अपने ही पैसे रिफंड के लिए उनको महीनों दौड़ लगाने पड़ते हैं। कई बार सीएमओ कार्यालय के स्तर पर उनको परेशान भी किया जाता है। यह सुविधा लागू होती तो कर्मचारी अपनी आईईडी बताकर कही भी इलाज कराता। उसके इलाज का पैसा सरकार की तरफ से सीधे अस्पताल के अकाउंट में चला जाता। इससे पारदर्शिता भी रहती है।
10 दिनों तक कर्मचारियों ने हड़ताल चलाया था
तीन वेतनमान समेत कई मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी महासंघ (अजय सिंह गुट) और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद (हरिकिशोर तिवारी गुट) ने संयुक्त तौर पर नवंबर 2013 में हड़ताल का ऐलान किया था। तत्कालीन सपा सरकार के समय 10 दिनों तक प्रदेश के 200 विभागों में ताला पड़ा रहा। प्रदेश की चौथी बड़ी हड़ताल की गई। उसके बाद कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया। तीन मांगों पर सरकार और कर्मचारियों की बीच एक समिति बनी। उसमें कैशलेस का मुद्दा था। उस समय इसका पूरा प्रारूप तैयार हुआ। लेकिन प्रदेश के 9 लाख से ज्यादा नियमित राज्य कर्मचारियों को इस सुविधान का लाभ नहीं मिल पाया है।
