शारदीय नवरात्र के विशेष अवसर पर बरेली कीशीतल की कहानी सभी के लिए प्रेरणादायक है। अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण से उन्होंने रेलवे में अलग पहचान बनाई है। पूर्वोत्तर रेलवे की पहली महिला चीफ ट्रेन कंट्रोलर बनीं शीतल के नाम कई उपलब्धियां हैं।
मूल रूप से अल्मोड़ा की रहने वालीं शीतल ने काफी संघर्ष के बाद यह मुकाम हासिल किया है। एमकॉम की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने वर्ष 2014 में रेलवे में ट्रेन क्लर्क (गाड़ी बाबू) के रूप में करियर की शुरुआत की थी। आज वह पूर्वोत्तर रेलवे की पहली महिला गाड़ी नियंत्रक हैं। वर्तमान में बरेली के कर्मचारी नगर में अपनी मां के साथ रहने वालीं शीतल सुरक्षित और सुचारु ट्रेन संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
उनका सपना एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर देशसेवा करने का था, मगर परिस्थितियों ने राह को नई दिशा दे दी। उनकी मां की इच्छा बेटी को रेलवे अफसर के रूप में देखने की थी। शीतल ने मां की बात मानते हुए तैयारी की और रेलवे में अपना सफर शुरू किया। वह अपनी मां को रोल मॉडल मानती हैं।
चीफ ट्रेन कंट्रोलर बनी बिटिया के नाम उपलब्धियां तमाम
चीफ ट्रेन कंट्रोलर के रूप में शीतल के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं। इनमें वर्ष 2015 का डीआरएम अवॉर्ड, कोरोना काल में कोरोना वॉरियर सम्मान और वर्ष 2025 में स्काउट्स एंड गाइड्स की ओर से मिला राष्ट्रपति पुरस्कार शामिल है। बरेली सिटी जैसे बड़े यार्ड को संभालने वाली पहली महिला के रूप में भी उन्हें पहचान मिली। उनके कार्यकाल में बरेली सिटी से कासगंज सिटी तक इलेक्ट्रिक लाइन शुरू होने के दौरान भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। हाल ही में रेलवे पर लिखी कविता के लिए उन्हें डीआरएम की ओर से द्वितीय पुरस्कार मिला।
रेलवे सेवा के साथ शीतल ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट खिलाड़ी और नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं। उनकी मां भी ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट और स्टेट गोल्ड मेडलिस्ट हैं। शीतल अपनी सफलता का श्रेय मां के सहयोग, वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन और सहकर्मियों के विश्वास को देती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं को समान अवसर और बेहतर सुविधाएं मिलें, तो वे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर सकती हैं।
शिफ्ट में ड्यूटी, सतर्कता और काम के दबाव के बीच कई बार भोजन, पानी और विश्राम तक के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। शीतल महिला कर्मचारियों के लिए अलग चेंजिंग रूम और कार्यालय में हर तीन-चार महीने में स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत बताती हैं।
