कुशीनगर। कुशीनगर जिले में तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के जवहीं दयाल के पास एपी तटबंध टूटने के करीब 36 घंटे बाद भी कटे हिस्से की मरम्मत नहीं हो सकी है। नदी की तेज धारा के सामने बचाव कार्य लगातार चुनौती बना हुआ है। एपी तटबंध टूटने के बाद कटान रोकने के लिए बोल्डर, जियोबैग और बोरियों के जरिए बचाव कार्य किया जा रहा है, लेकिन नदी की तेज धारा के सामने यह प्रयास फिलहाल कारगर नहीं हो पा रहा है। शुरुआत में करीब 20 मीटर कटा तटबंध अब 200 मीटर से अधिक फैल चुका है। लगातार कटान के चलते तटबंध का बड़ा हिस्सा खतरे की जद में बना हुआ है।
तेज बहाव में बह जा रही बचाव सामग्री
तटबंध को बचाने के लिए नदी की तेज धारा के कारण बचाव कार्य में डाली जा रही सीमेंट, बोल्डर और अन्य सामग्री से भरी बोरियां भी पानी के तेज बहाव में बह जा रही हैं। लेकिन नदी की धारा इतनी तेज है कि कई कई बोरियां बह जा रही हैं। इससे कटे हिस्से को बंद करने में मुश्किल आ रही है और कटान लगातार बढ़ता जा रहा है।
पुराने कटान वाले क्षेत्र में बढ़ी ग्रामीणों की चिंता
तटबंध टूटने के बाद अब अमवा और शिवपुर से ट्रॉलियों के जरिए बोल्डर मंगाए जा रहे हैं। इसके अलावा बाहर से भी ट्रकों से बोल्डर गिराये जा रहे हैं।
ग्रामीणों का सवाल- पहले से क्यों नहीं था पर्याप्त स्टॉक?
ग्रामीणों का सवाल है कि जब एपी तटबंध पर हर साल बाढ़ और कटान का खतरा बना रहता है तो आपात स्थिति से निपटने के लिए बोल्डर, जियोबैग और अन्य जरूरी सामग्री का पर्याप्त स्टॉक पहले से क्यों नहीं रखा गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मौके पर पहले से पर्याप्त बचाव सामग्री उपलब्ध रहती तो कटान रोकने का काम समय रहते शुरू किया जा सकता था।
दर्जनों गांवों पर मंडरा रहा संकट
ग्रामीण भी विभाग के साथ मिलकर बचाव कार्य में सहयोग कर सकते थे। लेकिन संसाधन समय पर उपलब्ध नहीं होने से तटबंध का कटाव बढ़ता गया और अब आसपास के दर्जनों गांवों पर संकट मंडरा रहा है।
जल शक्ति मंत्री ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
तटबंध टूटने के बाद मंगलवार को जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने बाढ़ खंड के अधिकारियों और अभियंताओं से तटबंध की स्थिति तथा चल रहे बचाव कार्यों की जानकारी ली और राहत-बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान विभागीय तैयारी और बोल्डर के स्टॉक को लेकर भी सवाल उठे।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र में नदी की धारा बदलने और तटबंध पर दबाव बनने का पुराना इतिहास है, वहां आपातकालीन संसाधन पहले से उपलब्ध रहने चाहिए थे। निरीक्षण के दौरान गोरखपुर मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह, गोरखपुर जोन के अपर पुलिस महानिदेशक राम कुमार, जिलाधिकारी संजय चौहान, पुलिस अधीक्षक केशव कुमार समेत बाढ़ खंड के अधिकारी और अभियंता मौजूद रहे।
