रेलवे महकमे की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं की हकीकत परखने के लिए मंगलवार शाम को एक अनोखा और सख्त अभियान चलाया गया। अचानक ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने और यात्रियों के घायल होने की सूचना प्रसारित होते ही रेलवे प्रशासन में हकीकत में खलबली मच गई। कुछ ही पलों में आरपीएफ, स्थानीय पुलिस बल,रेलवे सुरक्षा अधिकारी, स्टेशन मास्टर, अधीक्षक और एंबुलेंस सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंच गए। हालांकि, जब सबको यह पता चला कि यह महकमे द्वारा आयोजित एक ‘मॉक ड्रिल’ (अभ्यास) थी, तब जाकर सभी ने राहत की सांस ली।
इस गुप्त मॉक ड्रिल की योजना सीनियर डीएसओ (लखनऊ) अरुण कुमार, टी सेफ्टी (लखनऊ) एन.एल. पांडेय, पीडब्ल्यूआई सेफ्टी सुनील कुमार और ट्रैफिक सेफ्टी एसपी गौतम द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई थी। अभियान की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इसकी भनक किसी भी स्थानीय कर्मचारी या अधिकारी को नहीं लगने दी गई। योजना के तहत सीनियर डीएसओ अरुण कुमार और टी सेफ्टी एन.एल. पांडेय प्रतापगढ़ से वाराणसी जाने वाली पैसेंजर ट्रेन (55142) पर सवार हुए। जैसे ही ट्रेन गौरा रेलवे स्टेशन के पास गौरा माइनर के समीप पहुंची, अधिकारियों ने ट्रेन को रुकवा दिया। इसके बाद ट्रेन के गार्ड और गौरा स्टेशन पर ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मास्टर रवि प्रकाश मिश्र के माध्यम से यह सूचना प्रसारित कराई गई कि ट्रेन की दो बोगियां डिरेल (पटरी से उतर) हो गई हैं और कुछ यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। सूचना लीक न हो और वास्तविकता की सही परख हो सके, इसलिए अधिकारियों ने तुरंत गार्ड और स्टेशन मास्टर के मोबाइल अपने कब्जे में ले लिए।
प्रशासन की तत्परता पर जताई गई संतोषजनक प्रतिक्रिया
दुर्घटना की सूचना मिलते ही महकमे में अफरातफरी का माहौल बन गया, लेकिन सभी संबंधित विभाग और दल न्यूनतम समय में घटनास्थल पर पहुंच गए। रेलवे सुरक्षाबलों, चिकित्सा टीमों और प्रशासनिक अधिकारियों की इस त्वरित और सतर्क कार्रवाई को देखकर रेल महकमे ने राहत की सांस ली और अधिकारियों ने पूरी टीम की तत्परता पर संतोष व्यक्त किया।
जानिये क्या बोले अधिकारी
सूचना मिलने के मात्र 15 से 20 मिनट के अंदर फतनपुर और रानीगंज थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई थी। बाद में पता चला कि मॉकड्रिल है। इसका मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में पुलिस, प्रशासन और रेलवे की प्रतिक्रिया समय और बचाव तैयारियों को परखना था।
