कानपुर में H1N1 का बढ़ा खतरा, एक मौत से हड़कंप, अस्पताल में बेड-वेंटिलेटर रिजर्व

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उत्तर प्रदेश के कानपुर में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। इस सीजन में H1N1 संक्रमण से 30 वर्षीय युवक की मौत की पुष्टि हुई है। इसके अलावा चार साल के बच्चे और 53 वर्षीय महिला में भी संक्रमण मिला है। लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज समेत शहर के सरकारी अस्पतालों में विशेष तैयारियां की गई हैं। H1N1 मरीजों के लिए बेड आरक्षित करने के साथ गंभीर मरीजों के इलाज के लिए वेंटिलेटर की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को संदिग्ध मरीजों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

एक मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी निगरानी

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कन्नौज निवासी 30 वर्षीय युवक को 28 अगस्त को बुखार और पेट दर्द की शिकायत के बाद कल्याणपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान एक सितंबर को उसकी मौत हो गई। बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई। मौत की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का फोकस ऐसे मरीजों की जल्द पहचान पर है, जिनमें फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। अस्पतालों को भी निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध मामलों में मरीज की स्थिति के अनुसार जांच और उपचार की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।

बच्चे और महिला में भी संक्रमण की पुष्टि

कानपुर में चार साल के बच्चे में भी H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमण की पुष्टि के बाद बच्चे को अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। वहीं, उन्नाव निवासी 53 वर्षीय महिला की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। महिला को उपचार के लिए रेफर किया गया है। इसके अलावा एक अन्य संदिग्ध मरीज का इलाज हैलेट अस्पताल में चल रहा है। नए मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन मरीजों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

सरकारी अस्पतालों में बेड रिजर्व

H1N1 के मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए सरकारी अस्पतालों में पहले से ही बेड आरक्षित किए गए हैं। एलएलआर यानी हैलेट अस्पताल में 30 बेड, उर्सला में 15 से 20 बेड, जबकि केपीएम और कांशीराम अस्पताल में 10-10 बेड रिजर्व किए गए हैं। इसके साथ ही जिले के सभी 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी पांच-पांच बेड आरक्षित रखे गए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर मरीजों को तत्काल भर्ती की सुविधा उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अस्पतालों को स्थिति के अनुसार तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी होने पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए उपचार व्यवस्था को बढ़ाया जा सकता है।

मेडिकल कॉलेज में अलग व्यवस्था, गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर तैयार

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में H1N1 के मरीजों की जांच और उपचार को लेकर भी विशेष तैयारी की गई है। संक्रमण की जांच के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। गंभीर मरीजों की स्थिति को देखते हुए वेंटिलेटर युक्त वार्ड और बेड रिजर्व रखे गए हैं। जरूरत पड़ने पर मेडिकल कॉलेज में वयस्क मरीजों के लिए 10 बेड और बच्चों के लिए 10 बेड वाले अलग वार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे संक्रमित या संदिग्ध मरीजों को अन्य मरीजों से अलग रखकर उपचार देने में मदद मिलेगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से मरीजों और तीमारदारों को संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। अस्पताल परिसर में अवेयरनेस कार्यक्रमों के जरिए लोगों को फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की जानकारी दी जा रही है।