बरेली, । प्रवासी पक्षियों के लिए वन विभाग ने दस स्थानों पर वेटलैंड विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए 50 हेक्टेयर से अधिक भूमि चिह्नित की गई है। इन वेटलैंड में जल संरक्षण के साथ पौधरोपण और जैव विविधता बढ़ाने के प्रयास होंगे, जिससे प्रवासी परिंदों को अनुकूल माहौल मिल सकेगा।
सदर तहसील के गांव कुतुबपुर, खजुराई इथमार्ली, ऐंठपुर, माधोपुर खालसा, फरीदपुर ब्लॉक के गांव मरौरीया गौस, चंदन मस्तकिल और असाना, नवाबगंज ब्लॉक के गांव असुआ, आंवला के सिरसा और मीरगंज ब्लॉक के काशीनाथपुर में यह वेटलैंड विकसित किए जाएंगे। डीएफओ दीक्षा भंडारी के अनुसार इन स्थलों पर जल संरक्षण, पौधरोपण और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इससे स्थानीय पक्षियों और जलीय जीवों के लिए बेहतर आवास उपलब्ध होगा। स्थल चयन, डिजाइन, जल संरक्षण और बड़े पैमाने पर पौधारोपण समेत तमाम तैयारियों को विभाग अंतिम रूप देने में लगा है।
इको-टूरिज्म को मिलेगी नई रफ्तार
नए वेटलैंड से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ””इको-टूरिज्म”” की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। प्राकृतिक जलस्रोतों के सुंदरीकरण और सघन पौधारोपण के बाद इन क्षेत्रों को बर्ड वॉचर्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि सर्दियों में रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी, बल्कि आसपास के बाजारों में स्थानीय रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
गिरते भूजल स्तर पर लगेगा ब्रेक
डीएफओ के अनुसार, जिले में 50 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर आकार लेने वाले ये नए वेटलैंड गिरते भूजल स्तर को सुधारने में लाइफलाइन साबित होंगे। जल संरक्षण की विशेष योजना के तहत इन वेटलैंड्स में वर्षा जल को संचित करने की व्यवस्था की जाएगी। इससे आसपास के दर्जनों गांवों में वाटर टेबल रिचार्ज होगी और गहराते जल संकट से बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा जिले में हरियाली का रकबा भी काफी हद तक बढ़ेगा।
