क्या बंगाल में होगा फ्लोर टेस्ट? ममता की जिद्द कितनी संवैधानिक, जानें राज्यपाल के पास कितनी ताकत

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भाजपा ने 2026 बंगाल चुनाव में 207 सीटें जीत कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। वहीं ममता बनर्जी की पार्टी TMC इस चुनाव में 80 सीटें जीतकर काफी पीछे रह गई। ऐसे में कल उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ तौर पर कहा कि मैं लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं देने वाली हूं। उन्होंने आगे कहा कि मैं हारी नहीं हरायी गयीं हूं। ममता के इस बयान के बाद बंगाल में नया बखेड़ा शुरू होता दिख रहा है। तो चलिए समझते है कि ममता बनर्जी की ये जिद्द कितनी संवैधानिक है।

बहुमत सबसे अहम होता है

संविधान के हिसाब से सरकार वही बना सकता है जिसके पास विधानसभा में बहुमत हो। तो बंगाल में BJP के पास स्पष्ट बहुमत है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा मुख्यमंत्री (ममता बनर्जी) को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं रहता है फिर भले ही वे इस्तीफा न दें।

राज्यपाल की भूमिका क्या है?

बंगाल के राज्यपाल इस स्थिति में निर्णायक भूमिका में आ जाते है। वे मुख्यमंत्री से कह सकते हैं कि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट (बहुमत साबित करना) करें। अगर मुख्यमंत्री फ्लोर टेस्ट से बचते हैं या हार जाते हैं तो राज्यपाल उन्हें पद से हटा सकते हैं।

आखिर क्या होता है फ्लोर टेस्ट?

आपको बता दें कि फ्लोर टेस्ट में यह साबित करना होता है कि किसके पास बहुमत है। अगर ममता बनर्जी बहुमत साबित नहीं कर पातीं, तो उनकी सरकार गिर जाएगी। इसके बाद राज्यपाल BJP को सरकार बनाने का न्योता देंगे।

इस्तीफा न देने पर क्या होगा?

अगर बंगाल की मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देतीं और बहुमत भी नहीं दिखा पातीं, तो राज्यपाल सीधे उन्हें हटा सकते हैं। यह संवैधानिक रूप से वैध है क्योंकि मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए बहुमत जरूरी है।

संविधान के हिसाब से क्या होगा?

पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 तक ही है। इस स्थिति में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के पास पावर होती हैं कि वह CM से इस्तीफा मांग सकते हैं या उनका कार्यकाल खत्म होने का इंतजार कर सकते हैं।

बंगाल में बीजेपी कैसे बनाएगी सरकार?

नई विधानसभा के नतीजे आ चुके हैं। राज्यपाल BJP को न्योता भेज सकते हैं या बीजेपी राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा कर सकती है। BJP विधायक दल का नेता चुनेगी और फिर मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुहर लग जाएगी। जिसके बाद नई सरकार का शपथ ग्रहण होगा और राज्यपाल मुख्यमंत्री और उनकी सरकार में मंत्री बनने वाले विधायकों को शपथ दिलाएंगे और नई सरकार बन जाएगी।

Mamata Banerjee फिर भी हटने से इनकार करें तो?

ममता के पास विकल्प बहुत कम है। वह केयरटेकर CM की तरह कुछ दिन रह सकती हैं लेकिन उनका टर्म खत्म होते ही उनका पद अपने आप खत्म हो जाएगा। उसके बाद नई सरकार जरूर बनेगी। संविधान में ‘जबरदस्ती कुर्सी पकड़े रहना’ संभव नहीं है। अगर ममता को चुनाव में गड़बड़ी लगती है तो वह कोर्ट में चुनौती दे सकती है लेकिन जब तक कोर्ट कुछ फैसला न दे तब तक चुनाव परिणाम में जिसकी जीत हुई है, उसे ही सही माना जाएगा।

कर्नाटक में 2019 में हुआ था Floor Test

बता दें कि तत्कालीन मुख्यमंत्री H. D. Kumaraswamy ने Congress + JDS के गठबंधन के साथ सरकार बनाई थी लेकिन कुछ समय के बाद कई विधायक ने सरकार से अपना समर्थन वापस खींच लिया था। इसके बाद सरकार अल्पमत में आ गई थी और विपक्ष के कहने पर राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट करवाया और सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाई। इसके बाद H. D. Kumaraswamy की सरकार गिर गई।

महाराष्ट्र (2022) में हुआ था Floor Test

साल 2022 में महागठबंधन की तरफ से उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे। उद्धव की सरकार में मंत्री रहे एकनाथ शिंदे ने बगावत कर दी थी। उद्धव के बहुत सारे विधायकों ने उनका साथ छोड़ शिंदे को अपना समर्थन दे दिया था और तब महाराष्ट्र के राज्यपाल ने विधान सभा में फ्लोर टेस्ट करवाया था लेकिन उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।

मध्य प्रदेश (2020) में हुआ था Floor Test

2020 में मध्यप्रदेश की कमान कमल नाथ के हाथों में थी लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के कई विधायकों ने बगावत कर दी थी। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बीजेपी (उस समय विपक्ष में थी) ने कमलनाथ सरकार के खिलाफ अल्पमत जारी किया था। इसके बाद राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट के लिए कहा लेकिन उससे पहले ही कमल नाथ ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया था।