जिले में आजकल एक ही चर्चा है कि ये प्रीपेड मीटर लगाने का क्या चक्कर है? पॉवर कॉर्पोरेशन की इस योजना ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है। सरकारी दावे हैं कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर से चोरी रुकेगी और बिलिंग पारदर्शी होगी, लेकिन आम लोगों को लगता है कि यह उनकी जेब काटने का नया तरीका है।
रामनगर कॉलोनी में शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे एक दुकान पर चाय बेच रहे रामकुमार ने पूछा कि ये स्मार्ट मीटर क्या है। उनके सामने बैठे किसान सुधीर यादव ने चाय का कप पटकते हुए कहा लगाने दो तो देखो, बिजली कट जाएगी तो कोई नहीं बचा पाएगा। ये प्रतिक्रिया स्मार्ट प्री पेड मीटर को लेकर अब सामने आ रही है। उपभोक्ताओं में आक्रोश है तो जिनके यहां लग गए हैं वह माथा पीट रहे हैं। रेतिया क्षेत्र में तो एक उपभोक्ता ने स्मार्ट प्री पेड मीटर ही कूच दिया जबकि लालबाग में एक ने लाइन ही उखाड़ दी।
रामनगर के मोहल्ले में रहने वाली रजिया बेगम ने बताया मेरे पति मजदूर हैं। महीने के आखिर में पैसा खत्म हो जाता है। पहले तो बिल आने पर कटौती कर लेते थे, अब मीटर में पैसे खत्म होते ही बिजली चली जाएगी। बच्चे पढ़ाई कैसे करेंगे? दवा कैसे चलेगी?। शाम सुल्तानपुर रोड पर सैकड़ों लोग जमा हुए। महिलाएं स्लोगन लगा रही थीं प्रीपेड मीटर हटाओ, बिजली वापस लाओ। युवा नेता अखिलेश वर्मा माइक थामे चिल्ला रहे थे, सरकार कहती है विकास। रिचार्ज का नेटवर्क भी नहीं है, गांव में नेटवर्क नहीं आता तो कैसे रिचार्ज करेंगे? बुजुर्ग किसान हरिशंकर ने कहा मेरे खेत में ट्यूबवेल है। पहले बिल 1800 रुपये आता था। अब अगर मीटर में 500 रुपये डाल दिए और पानी की जरूरत पड़ी तो? बीच में पैसे खत्म हो गए तो फसल सूख जाएगी। फिर कौन जिम्मेदार होगा?
