सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के बाद निलंबित किए गए पीसीएस अलंकार अग्निहोत्री ने बुधवार को शासन की ओर से जारी हुए आरोपपत्र का कुछ हिस्सा अपनी फेसबुक वॉल पर शेयर किया है। उस पर सवाल उठाते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने कहा है कि जब वह पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं तो उसके बाद निलंबित करने का कोई प्रश्न नहीं होता है और गलत तरीके से निलंबित कर आरोप पत्र दिया है। यही नहीं आरोप पत्र में वर्णित आरोप संख्या दो में यह लिखा है कि उन्होंने ब्राह्मण और सामान्य वर्ग की बात की है।
अलंकार अग्निहोत्री ने जवाब में लिखा है कि तुम कभी सामान्य वर्ग और ब्राह्मणों की बात करोगे ही नहीं, बस कुछ ब्राह्मणों को एमपी-एमएलए बनाकर अत्याचार करते रहो, इसलिए विभाजनकारी सरकार की नौकरी को मैंने त्याग दिया। वहीं, आरोप पत्र में वर्णित आरोप संख्या दो में अलंकार अग्निहोत्री के लिए लिखा है कि 26 जनवरी के अपने त्याग पत्र में विशेष जातियों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ, भूमिहार आदि व सामान्य वर्ग का पक्ष रखने का उल्लेख किया है।
केंद्र व राज्य सरकार को ब्राह्मण विरोधी सरकार होने का बयान दिया। बरेली के नगर मजिस्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए सभी जाति और धर्म के लोगों को समान न समझते हुए जातिगत भावना से द्वेषपूर्ण बयान दिया गया, जिससे आम जनमानस में शासन की छवि धूमिल हुई है। यह कृत्य उप्र सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 के नियम-4 (1) एवं नियम-7 (1) के उल्लंघन का संकेत है, इसके लिए आप दोषी प्रतीत होते हैं।
