उप्र. में स्टार्टअप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्किलिंग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। सरकार का लक्ष्य एआई और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में करीब 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना है। स्टार्टअप नीति और एआई प्रज्ञा प्रोग्राम के जरिए प्रदेश में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम तेज हुआ है।
स्टार्टअप नीति, एआई स्किलिंग और तकनीकी निवेश के संयुक्त प्रयासों से कानपुर, लखनऊ, नोएडा और वाराणसी जैसे शहरों में स्टार्टअप गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। इससे एमएसएमई सेक्टर को नई दिशा मिल रही है और युवा उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए प्रदेश के 49 आईटीआई संस्थानों में एआई लैब स्थापित की जा रही हैं। इन प्रयोगशालाओं में छात्रों को एआई, डेटा एनालिटिक्स और उन्नत डिजिटल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सकें। आईटी और तकनीकी क्षेत्र में बढ़ते निवेश का असर निर्यात पर भी दिख रहा है। प्रदेश से आईटी-आईटीईएस सेक्टर का निर्यात बढ़कर 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
राज्य में 100 से अधिक स्टार्टअप इन्क्यूबेटर होंगे विकसित
प्रदेश में टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) की करीब 400 यूनिट्स सक्रिय हैं। इसके साथ ही राज्य में 100 से अधिक स्टार्टअप इन्क्यूबेटर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन इन्क्यूबेटरों के जरिए युवाओं को अपने नवाचार और तकनीकी विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी के माध्यम से युवाओं को आधुनिक डिजिटल स्किल्स और एआई तकनीक की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में करीब 65 प्रतिशत हिस्सेदारी
इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में करीब 65 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रदेश एक बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। इससे स्टार्टअप और एमएसएमई सेक्टर को भी नई ऊर्जा मिल रही है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से जुड़ी सप्लाई चेन में छोटे और मध्यम उद्योगों को नए अवसर मिल रहे हैं, जिससे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिल रही है।
