ग्रामीण अवसंरचना विकास को गति देने के लिए मुख्य सचिव एसपी गोयल ने आरआईडीएफ (ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि) से वित्त पोषित परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी कार्यदायी विभाग नाबार्ड को प्रतिपूर्ति दावे, परियोजना स्वीकृति और परियोजना पूर्णता प्रमाणपत्र (पीसीआर) तय समयसीमा में अनिवार्य रूप से भेजें।
वित्तीय वर्ष 2025–26 से संबंधित हाई पावर कमेटी की चतुर्थ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि दस्तावेजों में देरी से ऋण संवितरण और परियोजनाओं की गति प्रभावित होती है। उन्होंने नाबार्ड और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में पीवाईजी व स्लो मूविंग प्रोजेक्ट्स की अलग से समीक्षा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं का विस्तृत ब्योरा तत्काल नाबार्ड को भेजा जाए, ताकि अड़चनों की पहचान कर उन्हें दूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल स्वीकृति नहीं, बल्कि समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करना है। मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि सभी कार्यदायी विभाग अपनी परियोजनाओं की क्वार्टली प्रोगेस रिपोर्ट नियमित रूप से नाबार्ड को प्रेषित करें, जिससे परियोजनाओं की रीयल-टाइम निगरानी संभव हो सके और किसी भी स्तर पर विलंब को तुरंत पकड़ा जा सके।
इससे पूर्व नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार ने अवगत कराया कि चालू वित्तीय वर्ष में ग्रामीण अवसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए 3000 करोड़ रुपये के ऋण संवितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष अब तक 1751 करोड़ रुपये विभिन्न स्वीकृत परियोजनाओं के लिए जारी किए जा चुके हैं। बैठक में प्रमुख सचिव पशुपालन मुकेश कुमार मेश्राम, प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग, प्रमुख सचिव लोक निर्माण अजय चौहान, सचिव वित्त संदीप कौर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
