लखनऊः उत्तर प्रदेश विधानसभा में परिषदीय विद्यालयों के कथित बंदी के मुद्दे पर सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। समाजवादी पार्टी (सपा) के कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है, जबकि गांव-गांव शराब की दुकानें खोली जा रही हैं। सपा विधायकों ने शिक्षकों की कमी, भर्तियों में देरी और टीईटी को अनिवार्य किए जाने जैसे मुद्दों पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।
सपा सदस्यों ने कहा कि परिषदीय विद्यलय ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार की नीतियों के कारण उनकी स्थिति कमजोर हो रही है। शिक्षकों की नियुक्तियां लंबित हैं और कई स्कूल स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जवाब में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह स्पष्ट किया कि सरकार ने किसी भी परिषदीय विद्यालय को बंद करने का निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों की स्थिति की समीक्षा की जा रही है, लेकिन एक भी स्कूल बंद नहीं किया गया है। मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। निजी स्कूलों की फीस और किताब-ड्रेस के नाम पर वसूली के मुद्दे पर भी सदन में चर्चा हुई। मंत्री ने बताया कि राज्य में फीस रेगुलेशन एक्ट लागू है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति शिकायतों की जांच करती है और दोषी पाए जाने पर निजी विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
