दिल्ली/वाशिंगटन। अमेरिका और भारत ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की घोषणा की। इसके तहत अमेरिका, भारत पर शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। भारत-अमेरिका ने संयुक्त बयान में यह कहा।
समझौते के अनुसार, भारत, अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट तथा अन्य उत्पादों सहित कई प्रकार के अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त या कम करेगा।
दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा, ”अमेरिका और भारत को पारस्परिक और द्विपक्षीय रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।” बयान के अनुसार यह रूपरेखा 13 फरवरी, 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए व्यापक अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते की वार्ता के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस रूपरेखा में अतिरिक्त बाजार पहुंच संबंधी प्रतिबद्धताएं शामिल होंगी और यह अधिक मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन प्रदान करेगी। समझौते की मुख्य शर्तों के अनुसार, अमेरिका, भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। अमेरिका ने पिछले साल अगस्त में, रूस से तेल की खरीद को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क के साथ अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था।
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, इसलिए भारतीय निर्यातकों को 50 प्रतिशत के इस शुल्क से भारी नुकसान हुआ था। शुल्क में कमी से भारत के कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबड़, जैविक रसायन, घरेलू सजावट, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। बयान के अनुसार, अंतरिम समझौते के सफल समापन के बाद, जेनेरिक दवाइयों, रत्न और हीरों तथा विमान के कल-पुर्जों सहित कई वस्तुओं पर शुल्क शून्य हो जाएगा।
इससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को और मजबूती मिलेगी। इसमें कहा गया है कि अमेरिका, भारत के कुछ विमानों और विमान कल-पुर्जों पर लगे शुल्क को भी हटा देगा। बयान में कहा गया है, ”इसी प्रकार, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों को समाप्त करने को लेकर लगाए गए शुल्क के तहत वाहन कल पुर्जों के लिए तरजीही शुल्क दर कोटा प्राप्त होगा।”
दोनों देश अपने-अपने हित के क्षेत्रों में एक-दूसरे को निरंतर आधार पर तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देश वस्तुओं के उत्पादन से संबंधित उत्पत्ति के नियम भी स्थापित करेंगे जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि समझौते का लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को मिले। इसके अलावा, दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करेंगे, जो कि 191 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
बयान में कहा गया है कि भारत ने अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके अलावा, भारत ने आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को समाप्त करने पर सहमति जताई है। इससे बाज़ार में पहुंच में देरी होती है या ये अमेरिका के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी उत्पादों पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगाती हैं।
बयान के अनुसार, “दीर्घकालीन चिंताओं के समाधान के लिए मिलकर काम करने के महत्व को समझते हुए, भारत अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों के व्यापार में दीर्घकालिक गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने पर भी सहमत है।” इसमें कहा गया है, ”भारत का अगले पांच साल में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के कल-पुर्जे, बहुमूल्य धातु, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा है।”
भारत और अमेरिका ‘ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट’ और डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले अन्य सामानों सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों में व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे और संयुक्त प्रौद्योगिकी सहयोग का विस्तार करेंगे। दोनों देशों ने लागू तकनीकी विनियमों के अनुपालन को सुगम बनाने के उद्देश्य से पारस्परिक रूप से सहमत क्षेत्रों के लिए अपने-अपने मानकों और मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करने की योजना बनाई है।
संयुक्त बयान में कहा गया है, ”किसी भी देश द्वारा तय किए गए शुल्क में किसी भी बदलाव की स्थिति में, अमेरिका और भारत इस बात पर सहमत हैं कि दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकता है।” दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के तहत बातचीत के माध्यम से बाजार पहुंच के अवसरों को और बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे।
