समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि प्रदेश में भाजपा के महाभ्रष्ट राज में मेला आयोजन भी कमीशनखोरी का माध्यम बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेले के नाम पर पचासों हजार रुपये की महा-रकम कमीशन के रूप में हड़पी जा रही है और इसी ‘मेला महाभ्रष्टाचार’ के चलते साधु-संतों तक को सम्मान नहीं मिल पा रहा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि जिन साधु-संतों का दर्शन मात्र आशीर्वाद होता है, उनके साथ शासन-प्रशासन द्वारा अपमानजनक और हिंसक दुर्व्यवहार किया जा रहा है। यह इसलिए हो रहा है क्योंकि मेला प्रबंधन में कमीशनखोरी के इस गोरखधंधे में भाजपाई गुट और उनके संगी-साथियों की मिलीभगत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को कमिश्नर की जगह ‘कमीशनर’ का नया पद बना देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि माघ मेला क्षेत्र में पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी साधु-संतों और भक्तों के साथ दुर्व्यवहार अक्षम्य है। सदियों से चली आ रही शाही स्नान की सनातनी परंपरा में भाजपा सरकार बार-बार विघ्न डाल रही है। सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या का शाही स्नान कोई नई परंपरा नहीं है, फिर ऐसी घटनाएं भाजपा सरकार में ही क्यों हो रही हैं। इसके लिए भाजपा का कुशासन और नाकाम व्यवस्था ही जिम्मेदार है।
फार्मासिस्ट भर्ती में बी-फार्मा छात्रों के साथ अन्याय
इसी क्रम में अखिलेश यादव से उत्तर प्रदेश फार्मेसी ग्रेजुएट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि यूपी एसएससी सेवा आयोग के अंतर्गत फार्मासिस्ट भर्ती में बी-फार्मा के बेरोजगार छात्रों को भी शामिल किया जाए। उन्होंने बताया कि चार वर्षीय बी-फार्मा कोर्स करने वाले छात्रों को अयोग्य मानते हुए केवल डी-फार्मा को पात्र किया जा रहा है, जबकि बी-फार्मा छात्रों ने दो वर्ष अधिक अध्ययन किया है। ज्ञापन के अनुसार प्रदेश में 2002 के बाद फार्मासिस्ट की कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई, जिसके कारण बी-फार्मा बेरोजगार छात्रों की संख्या बढ़कर करीब 4.5 लाख हो गई है। अखिलेश यादव ने इस मांग को जायज बताते हुए नियमों में बदलाव कर बी-फार्मा छात्रों को भर्ती में शामिल किए जाने की जरूरत बताई।
