दिल्ली। ईरान में जारी नागरिक अशांति का असर भारत के बासमती चावल के निर्यात पर पड़ना शुरू हो गया है जिससे घरेलू कीमतों में भारी गिरावट आई है। निर्यातकों को भुगतान में देरी और बढ़ती अनिश्चितताएं इसकी मुख्य वजह है। उद्योग संगठन ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) ने निर्यातकों से ईरानी अनुबंधों पर जोखिमों का पुनर्मूल्यांकन करने और भुगतान के सुरक्षित तरीके अपनाने का आग्रह किया। साथ ही ईरानी बाजार के लिए जरूरत से ज्यादा भंडार रखकर जोखिम नहीं लेने को कहा है।
व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल-नवंबर के दौरान ईरान को 468.10 अमेरिकी डॉलर का बासमती चावल निर्यात किया जिसकी कुल मात्रा 5.99 लाख टन थी। ईरान भारत का सबसे बड़ा बासमती चावल निर्यातक है लेकिन मौजूदा अस्थिरता के कारण चालू वित्त वर्ष में ऑर्डर प्रवाह, भुगतान चक्र और निर्यात पर दबाव बढ़ रहा है। इसका असर अब घरेलू मंडियों में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
पिछले एक सप्ताह में ही बासमती की प्रमुख किस्मों की कीमतों में भारी गिरावट आई है जो खरीदारों की झिझक, अनुबंधों में देरी और निर्यातकों के बीच बढ़े हुए जोखिम के प्रति आशंका को दर्शाती है। बासमती चावल की किस्म 1121 की घरेलू कीमत पिछले सप्ताह के 85 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। वहीं 1509 और 1718 किस्म की कीमत 70 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।
आईआरईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने बयान में कहा, ‘‘ईरान ऐतिहासिक रूप से भारतीय बासमती का एक प्रमुख बाजार रहा है। हालांकि, मौजूदा आंतरिक अशांति ने व्यापार माध्यमों को बाधित किया है, भुगतान में देरी की है और खरीदारों के विश्वास को प्रभावित किया है।’’ उन्होंने कहा कि निर्यातकों को विशेष रूप से ऋण जोखिम और निर्यात समयसीमा के संबंध में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
उद्योग संगठन ने कहा कि आयातकों ने भारत को मौजूदा प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और भुगतान करने में असमर्थता व्यक्त की है जिससे निर्यातकों के लिए अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है। आईआरईएफ ने एक परामर्श जारी किया है और हितधारकों से अपील की है कि वे पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के वैकल्पिक बाजारों का रुख करें ताकि ईरान जाने वाली खेप में किसी भी दीर्घकालिक मंदी से निपटा जा सके।
गर्ग ने कहा, ‘‘हम कोई चेतावनी नहीं दे रहे हैं बल्कि सावधानी बरतने का आग्रह कर रहे हैं। भू-राजनीतिक और आंतरिक अस्थिरता के दौर में व्यापार अकसर सबसे पहले प्रभावित होता है। निर्यातकों और किसानों दोनों की सुरक्षा के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।’’ आईआरईएफ ने कहा कि अमेरिकी शुल्क भी चिंता का विषय बने हुए हैं। उद्योग संगठन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों पर भी चिंता व्यक्त की जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि ईरान के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों को 25 प्रतिशत तक शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।
आईआरईएफ ने स्पष्ट किया कि अमेरिका को भारतीय चावल निर्यात पर पहले ही शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके बावजूद, अमेरिका को भारतीय चावल का निर्यात स्थिर बना हुआ है। भारत ने अप्रैल-नवंबर 2025-26 के दौरान अमेरिका को 2,40,518 टन बासमती और गैर-बासमती चावल का निर्यात किया जबकि समूचे वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 2,35,554 टन था।
भारतीय चावल के लिए अमेरिका विश्व स्तर पर 10वां सबसे बड़ा बाजार है और बासमती चावल के लिए चौथा सबसे बड़ा बाजार है। उद्योग संगठन ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित 25 प्रतिशत शुल्क मौजूदा 50 प्रतिशत शुल्क के अतिरिक्त लगाया जाएगा या नहीं।’’ आईआरईएफ ने कहा कि वैश्विक बाजारों में भारतीय बासमती की अनूठी स्थिति को देखते हुए शुल्क में और वृद्धि होने पर भी निर्यात में कोई महत्वपूर्ण गिरावट नहीं आएगी।
