UPSC 2018 यानी यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन, जिसे हिंदी में संघ लोक सेवा आयोग भी कहते हैं, में सैयद रियाज अहमद ने 261वीं रैंक हासिल की। वे काफी समय से इस परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे थे। पर लगातार मिलती असफलताओं ने सैयद को तोड़ कर रख दिया था। पर मुश्किलों के बाद भी सैयद ने हार नहीं मानी और अपने द्वारा की गई कड़ी मेहनत से 261वीं रैंक अपने नाम की।
सूत्रों के मुताबिक एक इंटरव्यू में अहमद ने बताया था कि उनके पिता और माता ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। उनके पिता तीसरी पास और माता सातवीं पास हैं। बता दें कि अहमद रियाज नागपुर के रहने वाले हैं। वे एक बार 12वीं में फेल हो गए थे, जिसके कारण उन्हें काफी जलालत का सामना करना पड़ा। उसके बाद उन्होंने फिर से परीक्षा दी और औसत अंक प्राप्त किए। उनके पास कॉलेज में पॉलिटिक्स विषय था।
उन्होंने बताया कि आईएएस की तैयारी के लिए 2013 में वे पूना चले गए और तैयारी शुरू कर दी। शुरुआत में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं थी। जब 2014 में पहला अटेंप्ट हुआ तो वे प्रीलिम्स यानी प्राथमिक परीक्षा में ही बाहर हो गए। फिर भी उनकी उम्मीद नहीं टूटी। 2015 में उन्होंने जामिया की आईएएस अकादमी में प्रवेश लिया। उसके बाद फिर प्रीलिम्स दिया तो उन्होंने 93 प्रश्न हल किए। पर उसमें भी वे फेल हो गए उन्होंने बताया कि नेगेटिव मार्किंग के कारण वे एक नंबर से रह गए।
उनका कहना था कि उस वक्त उन्हें एक अच्छे गाइडेंस की जरूरत थी। तब उन्होंने दोस्तों की सलाह मानी और अपनी रणनीतियों में बदलाव किए। उन्होंने अपने द्वारा बनाई गई स्ट्रेटजी का नाम 123 स्ट्रेटजी रखा। अब आप सोच रहे होंगे इसका मतलब क्या है? उन्होंने बताया है कि पहले नंबर पर वो प्रश्न थे जिन पर उन्हें पूरा विश्वास था। दूसरे नंबर पर वो प्रश्न थे जिनमें वो थोड़ा कंफ्यूज थे। और तीसरे नंबर पर वो प्रश्न जो उन्हें बिल्कुल नहीं आते।
सूत्रों के अनुसार उन्होंने बताया कि 2016 में प्री और मेंन्स तो पास कर लिया पर इंटरव्यू में फिर निराशा हाथ आई। चूंकि पापा रिटायर हो गए थे इसलिए अहमद नहीं चाहते थे कि अब पापा से पैसे मांगें।
2017 में चौथे अटेंप्ट में प्री पास करने के बाद मेंस क्लीअर नहीं हुआ। वे निराश हुए। पर फिर से पिता ने ही संभाला। उन्होंने कहा कि छोड़ दो पर सपना सपना ही रह जाएगा। इस साल भी फिर से मेंस क्लीअर हुआ पर इंटरव्यू में रह गए।
अहमद ने बताया कि फिर मैंने नौकरी तलाशने की प्रक्रिया शुरू की। स्टेट सर्विसेज की परीक्षा को क्लीअर करके वे रेंज फोरेस्ट ऑफिरस बन गए। अब पैसों की टेंशन नहीं थी। 2018 में मेंन क्लीअर हो गया। पर इंटरव्यू अच्छा नहीं हुआ। पिता साथ ही थे। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा लग रहा है कि तू IAS बन गया। 5 अप्रैल को जब परिणाम घोषित हुए तो पता चला कि 261वीं रैंक आई है। तब पिताजी को फोन किया और भरे हुए मन से बोला कि मैं सिलेक्ट हो गया।
