अदा शर्मा ने इंटरव्यू में किया खुलासा- ‘नाच-गाने में नहीं कोई रुचि…

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एक तमिल ब्राह्मण परिवार में जन्मीं अदा शर्मा की परवरिश मुंबई में हुई और अपनी मां की तरह वह शास्त्रीय नृत्य में पारंगत है लेकिन भरतनाट्यम नहीं बल्कि कथक। मलखम्भ पर चढ़ना भी उन्होंने अपनी मां से ही सीखा। मार्शल आर्ट्स में पारंगत अदा शर्मा फिल्म कमांडो 3 में अपने तेज और तासीर के साथ लौट रही हैं।
आपका एक वीडियो कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर खूब देखा गया जिसमें आप लाठी भांज रही हैं। मार्शल आर्ट्स सीखने की धुन आपको कैसे लगी?
सच कहूं तो मैं जो भी आज हूं, अपनी मां की वजह से हूं। लोग तो मुझे उनकी प्रतिकृति भी कहती हैं। वह अब भी मलखम्भ का अभ्यास रोज करती हैं। मैंने इसे सीखने के अलावा कलारीपयट्टू, कराटे आदि भी सीखा। फिल्म कमांडो 3 के ट्रेलर में जो कुछ भी मैं करती दिख रही हूं, उसमें कहीं किसी डुप्लीकेट या बॉडी डबल की मदद नहीं ली गई है। ये मेरा स्वाभाविक रूप है। और, मेरा तो यही कहना है कि हर बेटी को बचपन से ही पढ़ाई लिखाई के अलावा आत्मरक्षा के गुर भी जरूर सीखने चाहिए।

कमांडो 2 से कमांडो 3 तक आते आते आपका किरदार भावना रेड्डी कितना बदला है?
इसके बारे में बताने से तो फिल्म देखने का मजा जाता रहेगा लेकिन मैं ये कह सकती हूं कि मेरे बोलने का लहजा छोड़कर इस बार दर्शकों को सब कुछ पिछली फिल्म से बिल्कुल अलग देखने को मिलेगा। विद्युत जामवाल खुद मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स चैंपियन हैं और उनके साथ किसी फिल्म में काम करने से चुनौतियां अपने आप बढ़ जाती हैं। इस बार का मेरा एक्शन ऐसा है जिसे करते हुए हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने पहले किसी अभिनेत्री को नहीं देखा होगा।
आपने तो कैप्टन मार्वेल की याद दिला दी?
हॉलीवुड की तरह अब हिंदी सिनेमा में भी महिला किरदारों की कहानी में भूमिका बदल रही है। अब अभिनेत्रियां सिर्फ दिखावे के लिए फिल्म में नहीं हैं। उन्हें नाच गाने या पेड़ों के आसपास घूमने में कोई दिलचस्पी नहीं। खुशी इस बात की है कि विपुल शाह जैसे निर्माता इस बदलाव को समझ रहे हैं और कहानियों में दमदार महिला किरदारों के लिए जगह बना रहे हैं। सिनेमा में युग बदलते रहते हैं, ये युग महिलाओं का है।
तो महिला दर्शकों से क्या कहना चाहेंगी आप?
मुझे अमर उजाला के अपराजिता अभियान के बारे में बताया गया है। महिलाओं के चेहरों पर मुस्कान लाना हर हिंदुस्तानी का फर्ज होना चाहिए। मैं खुद भी अपराजिता अभियान का हिस्सा बनने को उत्सुक हूं और अमर उजाला के साथ मिलकर महिलाओं की मदद करना चाहती हूं। मेरा कहना यही है कि भरोसा खुद से शुरू होता है। हर महिला को खुद पर भरोसा करना चाहिए कि उसके लिए कोई चीज नामुमकिन नहीं है। बाकी सब अपने आप होता जाएगा।
कमांडो 3 के बाद किस फिल्म से चौंकाने वाली हैं आप?
मैं एक फिल्म कर रही हूं मैन टू मैन। ऐसा किरदार हिंदी सिनेमा में अभी तक नहीं देखा गया है। अबीर सेनगुप्ता की फिल्म में एक लड़के को प्यार हो जाता है और वह अपनी इस ‘प्रेमिका’ से शादी भी कर लेता है लेकिन उसे शादी के बाद ही पता चल पाता है कि ये प्रेमिका तो दरअसल एक लड़का है। मैं इसी लड़के का किरदार इस फिल्म में कर रही हूं।