अयोध्या में लगभग सात महीने से रामलला के महल क्षेत्र रामकोट की नित्य परिक्रमा अनवरत चल रही है। अब तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने रामकोट की परिक्रमा की है। संतों के साथ कई गृहस्थों ने इसे अपनी जीवन चर्या में शामिल कर लिया है।
श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि बृज में गोवर्धन की तरह रामलला के रामकोट की अनवरत परिक्रमा 21 अगस्त 2025 को तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ अयोध्या और गैर प्रातों से आने वाले संतों ने गाजे-बाजे के साथ परिक्रमा शुरू की थी। अब इसमें भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी है। परिक्रमा और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के अनुसार अब तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु परिक्रमा कर चुके हैं
अयोध्या की चार परिक्रमा 84 कोसी, 14 कोसी, पंचकोसी और रामकोट की परिक्रमा में रामकोट की परिक्रमा का अलग महत्व है। रामकोट वह क्षेत्र हैं जहां चक्रवर्ती सम्रांट राजा दशरथ के साथ रामलला निवास करते थे। राजा राम के साथ देवी-देवताओं, सर्वमान्य ऋषि मुनियों के स्थान है। नववर्ष के साथ अन्य पर्व व त्योहारों पर राम कोट की परिक्रमा अतीत मे भी की जाती रही है।
परिक्रमा में आने वाले महत्वपूर्ण मंदिर
-रामकोट परिक्रमा की परिधि के अंदर श्रीराम मंदिर के साथ हनुमानगढ़ी, कनक भवन, दशरथ महल सहित 108 प्रमुख मंदिर हैं।
जयघोष संग सुबह पांच बजे शुरू होती परिक्रमा
-जय सियाराम के जय घोष के साथ प्रतिदिन सुबह पांच बजे परिक्रमा शुरू होती है। भक्त राम धुन के साथ राम मंदिर के श्री रामानंदाचार्य गेट से परिक्रमा शुरू करते है। वापस आकर यहां परिक्रमा समाप्त करते हैं।
एक घंटे में तय होती 3.5 किमी. की दूरी
-रामकोट की परिक्रमा के लिए लगभग 3.5 किमी. की दूरी पैदल तय की जाती है। राम धुन, ढोल मजीरे के साथ राम मंदिर से टेढ़ी बाजार, कटरा, अशर्फी भवन चौराहे होते हुए फिर मंदिर के गेट पर पहुंचते हैं। इसमें करीब एक घंटे का समय लगता है।
संत-धर्माचार्य व महापौर हो चुके हैं शामिल
-श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, ट्रस्टी व निर्मोही अखाड़ा के श्रीमहान्त दिनेन्द्र दास जी, गोपाल जी, आचार्य नरेंद्र जी, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, पूर्व मेयर ऋषिकेश उपाध्याय, बावन मंदिर के महान्त वैदेही वल्लभ शरण जी, भानपुरा पीठ मंदसौर के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी, हनुमानगढी के पुजारी रमेश दासजी, महान्त सत्येंद्र दास जी सहित तमाम विशिष्ठ जन नित्य परिक्रमा में शामिल हो चुके हैं।
