सब्जियों में मौजूद आर्सेनिक बना रहा कैंसर का मरीज, लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग की रिसर्च में हुआ खुलासा

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लाखों किसान ऐसी भूमि पर खेती कर रहे हैं, जिसकी मिट्टी और पानी में आर्सेनिक जैसा ज़हर घुल है। ऐसे खेतों में उगाई सब्जियां और अन्य कृषि उपज लोगों को कैंसर और हृदय रोगी बना रही हैं। दरअसल मिट्टी और सिंचाई के पानी के जरिये जहरीला आर्सेनिक तत्व फसलों के जिरये हमारे खाने में शामिल हो रहा है। पालक जैसी हरी सब्जियां आर्सेनिक को तेजी से अपने शोख लेती हैं, इनका लंबे समय तक सेवन करने पर कैंसर, नसों और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा अधिक बढ़ जाता है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में प्रो. मोहम्मद इसराईल अंसारी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने एक नई और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक विकसित की है। उन्होंने पौधों से बनाए गए सिल्वर क्वांटम डॉट्स नामक बेहद सूक्ष्म कणों का उपयोग करके पालक को आर्सेनिक से सुरक्षित रखने का तरीका खोजा है। उनका शोध नीदरलैंड की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘प्लांट स्ट्रेस’ (एल्सेवियर) में प्रकाशित हुआ है। प्रो. अंसारी के अनुसार आर्सेनिक प्रदूषण खाद्य सुरक्षा को नुकसान पहुंचा रहा है। उनकी टीम द्वारा विकसित क्वांटम डॉट्स पौधों के भीतर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं और आर्सेनिक को खाने योग्य पत्तियों तक पहुंचने से रोकते हैं। यह तकनीक न केवल सुरक्षित है बल्कि पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल भी है।

नई तकनीक हुई तैयार

शोध के द्वारा इन क्वांटम डॉट्स को पालक की पत्तियों से ही एक हरित प्रक्रिया के जरिए तैयार किया गया। जब इन कणों को आर्सेनिक से दूषित मिट्टी में डाला गया, तो उन्होंने पौधों की कोशिकाओं के भीतर जाकर काम किया और जड़ों से पत्तियों तक आर्सेनिक ज़हर के पहुंचने की मात्रा को काफी हद तक कम कर दिया। इससे पालक ज्यादा स्वस्थ रही। साथ ही ये सूक्ष्म कण पौधों की अपनी रक्षा प्रणाली को भी मजबूत करते हैं, जिससे वे प्रदूषित माहौल में भी बेहतर तरीके से बढ़ पाते हैं। पत्तियां ज्यादा हरी रहती हैं, पौधे की पैदावार अच्छी होती है और पानी का संतुलन भी बना रहता है।

इन राज्यों में बढ़ी आर्सेनिक की मात्रा

मिट्टी और जल में आर्सेनिक की बढ़ती मात्रा मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए जहर का कार्य करता है। देश विभिन्न राज्यों में कृषि भूमि पर इसकी मात्रा चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। जिसमें पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और पंजाब जैसे राज्यों में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो चुकी है।

नई तकनीक स्वस्थ सब्जियां उगाने में मददगार

प्रो. मोहम्मद इसराईल ने बताया कि नई तकनीक आर्सेनिक से प्रभावित इलाकों में खेती के लिए नई उम्मीद बन सकती है। यह किसानों को सुरक्षित और स्वस्थ सब्जियां उगाने में मदद कर सकती है और लोगों को जहरीले भोजन से बचा सकती है। छोटे से दिखने वाले ये क्वांटम डॉट्स कण भविष्य में बड़ी समस्या का समाधान बन सकते हैं।