चेहरे पर कील-मुहांसें हो जाने से हमारे चेहरे की रंगत बिगड़ जाती है। कील-मुहांसों को दूर करने के लिए आप अपने चेहरे पर तरह-तरह के प्रॉडक्टस का इस्तेमाल किया होगा, लेकिन फिर भी आपको कोई लाभ नहीं होगा। तो इस बार योग को अपनाकर देखें। योग हर बीमारी का इलाज है। ऐसे कई योगासन हैं जिन्हे करके आप अपने चेहरे से कील-मुहांसें दूर कर पाएंगे और आपको मिलेगी एक बेदाग और चमकदार त्वचा।
शीतली और शीतकारी प्राणायाम
शीतकारी शब्द से तात्पर्य है कि ठंडक, यानी की एक ऐसी चीज जो हमें और हमारे शरीर को ठंडक का एहसास दिलाए। इस प्राणायाम को सीतकारी नाम से इसलिए भी जाना जाता है क्योंकि इस प्राणायाम को करते वक्त हमारे मुंह से सी की आवाज आती है। यह प्राणायाम बेहद ही सरल है। इस प्राणायाम को करने से शरीर के आतंरिक भाग की सफाई हो जाती है।
शीतली प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले पद्मासन की अवस्था में बैठ जाएं। अब अपने आंखों को बंद कर लें और शरीर को ढ़ीला छोड़ा दें। अपने गर्दन और सिर को सीधे रखें। इसके बाद अपनी जीभ को बाहर निकालें और थोड़ा सा मुंह खुला रखें ताकि सांस लेने में कोई परेशानी न आए।
अब अपनी जीभ को मोड़ लें और तालू के अग्र भाग पर लगाएं। अब धीरे-धीरे सांस लेने की कोशिश करें और इस तरह से सांस लें कि आपके मुंह से सी -सी की आवाज आए। इसके बाद आप अपनी सांस को रोक कर रख लें और कुछ देर बाद नाक के द्वारा बाहर निकाल दें। अब इस प्रक्रिया को 15- 20 बार दोहराएं।
शंख प्रक्षालन
इस आसन के अभ्यास से चेहरे की सारी गंदगी और कील-मुहांसे खत्म होने लगते हैं, क्योंकि यह शरीर की सारी गंदगी को बाहर निकाल देता है। इसलिए यह आसन कील-मुहांसो को दूर करने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। आप भी इस आसन को कर अपने चेहरे से कील मुहांसे हटा सकते हैं।
शंख प्रक्षालन करने के लिए सबसे पहले कागासन अवस्था में बैठ जाएं और तीन गिलास गुनगुना पानी पी लें। जब आप पानी पी लें उसके बाद सर्पासन हस्तेत्तानासन,कटिचक्रासन,उदराकर्षणासन आसनों का अभ्यास करें।
इन आसनों को करीब चार बार दोहराएं, इसके बाद दोबारा अपने अनुसार पानी पिएं और इन आसनों को फिर से दोहराएं। इसके बाद जैसे ही आपको मल त्याग महसूस होगा और तभी शौच हो कर आएं। शौच के समय सबसे पहले ठोस, उसके बाद अर्द्धठोस मल आएगा और आखिर में पीला पानी आने लगेगा।
इसके बाद दोबारा एक गिलास पानी पीकर चारों आसनों को तेज गति में दोहराएं। अब एक बार फिर मल त्याग ने की इच्छा होगी और इस बार मल में सिर्फ तरह पर्दाथ आएगा। पानी पीने की प्रक्रिया और आसन को तब तक करें जब तक मल में साफ पानी न आने लगे। आखिर में तीन गिलास गुनगुने पानी का सेवन करें और कुंजल क्रिया का अभ्यास करें। इससे पानी के बहाव को रोका जाता है। इस प्रक्रिया को छह महीने में एक बार करें।
