अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बाद कोरोना वायरस की वजह से पर्यटन, आतिथ्य और उद्योग के प्रभावित होने का असर अब आम लोगों पर पड़ने लगा है। लोकल सर्किल के एक सर्वे में ऐसा ही दावा किया गया है। इसमें कहा गया है कि खर्च बढ़ने और आमदनी घटने से 45 फीसदी परिवार अगले चार महीनों तक अपने खर्चों में कटौती करने की योजना बना रहे हैं।
लोकल सर्किल के ‘मूड ऑफ कंज्यूमर’ सर्वे में पूछा गया कि वे किस श्रेणी में 25,000 रुपये या उससे ज्यादा की खरीदारी करना चाहते हैं, इस पर 49 फीसदी परिवारों ने कहा कि इस दौरान उनकी बड़ी खरीदारी की कोई योजना नहीं है। 16 फीसदी ने कहा कि वे घूमने-फिरने में खर्च करेंगे, जबकि सात फीसदी ने अपने घर या संपत्ति को बेहतर करने की बात स्वीकारी।
सर्वे में शामिल छह फीसदी परिवारों ने कहा है कि वह एक कार खरीदेंगे, जबकि तीन फीसदी की योजना एसी, वॉशिंग मशीन जैसे व्हाइट गुड्स खरीदने की है। तीन फीसदी ने मोबाइल और लैपटॉप जैसे गैजेट खरीदने की बात स्वीकारी। 13 फीसदी परिवारों ने कहा कि वे कोई खर्च नहीं करेंगे।
विवेकाधीन खर्च में 75 फीसदी तक कटौती
सर्वे में शामिल लोगों से पूछा गया कि वे अगले चार महीने तक बाहर खाने-पीने, फिल्म देखने, लग्जरी उत्पाद खरीदने, कंफेक्शनरी और फैशन आदि जैसे विवेकाधीन खर्चों को बदलने की योजना कैसे बनाते हैं, इस सवाल के जवाब में नौ फीसदी परिवारों ने कहा कि वह इसमें 75 फीसदी तक कटौती करेंगे। इसके अलावा, 10 फीसदी परिवारों ने खर्च में 50 से 70 फीसदी तक कटौती की बात स्वीकारी। 15 फीसदी परिवारों की इन खर्चों में 25 फीसदी और 11 फीसदी परिवारों की 20 से 50 फीसदी तक कटौती की योजना है।
218 जिलों पर आधारित है सर्वे
लोकल सर्किल का यह सर्वे देश के 218 जिलों के 43,000 से अधिक परिवारों से बातचीत पर आधारित है। इसके मुताबिक, तीन फीसदी परिवारों ने कहा कि वे अपने खर्चों को 25 फीसदी तक बढ़ाएंगे। वहीं, इतने ही फीसदी परिवारों ने अपने खर्चों को 25 फीसदी से अधिक तक बढ़ाने की बात स्वीकारी। 37 फीसदी परिवारों ने कहा कि वे अपने खर्च के पैटर्न में कोई बदलाव नहीं करेंगे, जबकि 12 फीसदी ने इस संबंध में अभी कोई विचार नहीं किया है।
जरूरतें पूरी करने को पहले से अधिक खर्च
खर्च में वृद्धि एवं वेतन में बढ़ोतरी नहीं होने या घटने का असर बचत पर भी पड़ रहा है। वेतन वृद्धि नहीं होने से परिवार बचत करने से कतरा रहे हैं क्योंकि घरेलू जरूरतें पूरी करने में पहले से अधिक खर्च हो रहा है। सर्वे में शामिल लोगों से जब पूछा गया कि बचत की राशि कहां रखते हैं, इस पर सात फीसदी परिवारों ने कहा कि इसे बचत खाते में रखते हैं।
38 फीसदी ने सावधि जमा, 33 फीसदी ने इक्विटी एवं म्यूचुअल फंड, एक फीसदी ने सोना और 10 फीसदी ने अचल संपत्ति में निवेश की बात कही। नौ फीसदी परिवारों ने कहा कि उनके पास बचत के लिए कोई धनराशि बचती ही नहीं है।
