परमाणु युद्ध का खतरा नहीं उठा सकते हैं भारत-पाकिस्तान

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जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के खंड दो और तीन के हटने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। परमाणु युद्ध की धमकी देरहा है। दूसरी ओर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी कह चुके हैं कि भारत परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की अपनी नीति को बदल सकता है।

लेकिन क्या दोनों देश परमाणु युद्ध का जोखिम उठा सकते हैं?
अगर जापान के हिरोशिमा और नागासाकी की बात करें तो आज भी यहां परमाणु हमले का असर बरकरार है। परमाणु हमले के समय यहां बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। हालात नर्क से भी बदतर हो गए थे। परमाणु हमले का असर और उसका खौफ आज भी यहां के लोग महसूस करते हैं। तो अगर पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध होता है तो उसका असर भी छोटा-मोटा नहीं होगा।

परमाणु हमला हुआ तो यह होगा
अगर भारत-पाकिस्तान एक दूसरे पर परमाणु हमला करते हैं, तो काफी बड़ी तबाही मचेगी। बम जहां गिरेगा वहां से 0.79 किमी तक सबकुछ खाक हो जाएगा। परमाणु वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के अनुसार एयर ब्लास्ट-1 से 3.21 किलोमीटर तक झटके महसूस किए जाएंगे और 10.5 किलोमीटर तक इसका रेडिएशन फैलेगा। इससे 50 से लेकर 90 फीसदी लोग प्रभावित होंगे।

वहीं एयर ब्लास्ट-2 से 14.2 किमी तक फैली इमारतें ध्वस्त हो जाएंगी। थर्मल रेडिएशन का असर 47.9 किमी तक होगा। एयर ब्लास्ट-3 का प्रभाव 93.7 किमी तक फैलेगा और 100 किमी के दायरे में भीषण तबाही मचेगी।

हिरोशिमा-नागासाकी से अधिक तबाही
अगर भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध होता है और 1000 किलोटन तक के बम गिराए जाते हैं, तो इसका असर भी 100 किमी तक होगा। ये हमला हिरोशिमा और नागासाकी से भी अधिक नुकसान पहुंचाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय गिराए गए बमों की क्षमता आज के हिसाब से काफी कम थी। हिरोशिमा पर गिराया गया परमाणु बम 15 किलोटन का था और नागासाकी पर गिराया गया बम 20 किलोटन का था।

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